कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2025 पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के सशरीर सतलोक गमन की दिव्य कथा
कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस 2025: आइए जानें पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के सह-शरीर सतलोक गमन की दिव्य कथा
परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 507वें निर्वाण दिवस” के अवसर पर संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य में 6 से 8 फरवरी 2025 तक अमर ग्रंथ साहेब का तीन दिवसीय खुला पाठ किया जाएगा। इस अवसर पर 11 सतलोक आश्रमों में विशाल भंडारा, निःशुल्क नाम दीक्षा, रक्तदान शिविर, और दहेज मुक्त विवाह (रमैनी विवाह) जैसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्य किए जाएंगे।
क्या कबीर साहेब ही परमेश्वर हैं?
कई लोग कबीर साहेब को मात्र एक संत या कवि मानते हैं, लेकिन शास्त्रों में उनके पूर्ण परमेश्वर होने के प्रमाण मिलते हैं।
वेदों में प्रमाण: ऋग्वेद (मंडल 9, सूक्त 96, मंत्र 18) में "कविर्देव" का उल्लेख है, जो कबीर परमेश्वर की ओर संकेत करता है।
कुरान शरीफ में प्रमाण: सूरत अल-फुरकान (52-59) में भी "कबीर" शब्द परमेश्वर के संदर्भ में आया है।
परमेश्वर कबीर साहेब स्वयं इस धरती पर आए और तत्वज्ञान का प्रचार किया, जिससे जीवों को सही भक्ति और मोक्ष मार्ग की पहचान हो सके।
क्या अन्य देवी-देवता परमेश्वर हैं?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, पूर्ण परमेश्वर एक ही होते हैं और वे स्वयं धरती पर आते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश जैसे देवता केवल सौंपे गए कार्यों को पूरा करते हैं और वे काल ब्रह्म के अधीन हैं। गीता (अध्याय 18, श्लोक 62) में कहा गया है कि शरण पूर्ण परमात्मा की लेनी चाहिए, जो सभी पापों से मुक्त कर सकते हैं। मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण संत से सही मंत्र लेकर भक्ति करना आवश्यक है। अन्यथा, जीव 84 लाख योनियों में जन्म-मरण के चक्र में फंसा रहेगा।
कबीर परमेश्वर का सह-शरीर सतलोक गमन (निर्वाण दिवस)
माघ मास, शुक्ल पक्ष, एकादशी (वि. सं. 1575, सन् 1518) को कबीर परमेश्वर ने मगहर, उत्तर प्रदेश से लाखों लोगों के समक्ष सशरीर सतलोक गमन किया।
मगहर में निर्वाण क्यों लिया?
उस समय काशी (वाराणसी) के पंडितों ने यह झूठा प्रचार कर रखा था कि काशी में मरने से स्वर्ग मिलता है, जबकि मगहर में मरने से नरक। कबीर साहेब ने इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए घोषणा की कि वे मगहर में निर्वाण लेंगे। जब उन्होंने चादर ओढ़कर सतलोक गमन किया, तो वहां उपस्थित लोगों ने चादर हटाई, लेकिन शरीर नहीं मिला—सिर्फ सुगंधित फूल पाए गए। हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों ने उन फूलों को बांट लिया और अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार स्मारक बना लिए। यह घटना प्रमाणित करती है कि कबीर साहेब जन्म-मरण से परे थे और वे पूर्ण परमात्मा हैं।
काशी करौंत: एक अमानवीय कुप्रथा जिसे कबीर साहेब ने समाप्त किया
काशी में प्राचीन समय से एक अमानवीय परंपरा चल रही थी, जिसे "काशी करौंत" कहा जाता था। काशी में यह मान्यता थी कि काशी में मृत्यु होने पर मोक्ष मिलता है। कुछ स्वार्थी पंडितों और धार्मिक नेताओं ने इसका लाभ उठाने के लिए गंगा के किनारे एक विशाल आरी (करौंत) स्थापित कर दी और प्रचार किया कि यदि कोई वृद्ध व्यक्ति अपनी गर्दन इस आरी से कटवा ले, तो उसे तुरंत स्वर्ग प्राप्त होगा। कई वृद्ध, जो जीवन की कठिनाइयों से तंग आ चुके थे, इस झूठी आस्था के कारण अपनी गर्दन कटवाने लगे। यह प्रथा धीरे-धीरे धार्मिक धोखाधड़ी और व्यापार में बदल गई।
संत गरीबदास जी ने "काशी करौंत" का विरोध किया
महान संत गरीबदास जी ने इस कुप्रथा को खुलकर चुनौती दी।
उन्होंने कहा:
गरीब, बिना भगति क्या होत है, भावैं कासी करौंत लेह।
मिटे नहीं मन बासना, बहुबिधि भर्म संदेह।।
इसका अर्थ है कि बिना भक्ति के, चाहे कोई "काशी करौंत" ले या किसी अन्य विधि से मरे, मोक्ष संभव नहीं। सच्चा मोक्ष केवल तत्वज्ञान और पूर्ण संत से दी गई भक्ति विधि से ही प्राप्त होता है।
पाखंडी धर्मगुरुओं द्वारा फैलाई गई अफवाहें
जब वृद्धों की संख्या बढ़ने लगी और उनका भरण-पोषण कठिन होने लगा, तो धार्मिक नेताओं ने इस "करौंत" प्रथा को एक षड्यंत्र के रूप में फैलाया। लोगों की गर्दन काटी जाती और इसके लिए धन लिया जाता था। यदि किसी कारणवश करौंत ठीक से काम नहीं करता, तो कहा जाता कि "अभी आपका मोक्ष समय नहीं आया है, कुछ दिनों बाद प्रयास करें।" कबीर साहेब ने इस पाखंड को उजागर किया और इसे पूरी तरह से गलत बताया।
कबीर साहेब का दिव्य चमत्कार: सूखी आमी नदी में जल प्रवाहित किया
जब कबीर परमेश्वर मगहर पहुंचे, तो उन्होंने वहां की सूखी आमी नदी में जल प्रवाहित कर दिया। लोगों ने अपनी आंखों से देखा कि कैसे सिर्फ उनके स्पर्श मात्र से सूखी नदी में जल प्रवाहित हुआ। यह प्रमाण है कि कबीर साहेब ही सर्वशक्तिमान परमात्मा हैं।
मोक्ष प्राप्त करने का सही मार्ग क्या है?
कबीर परमेश्वर जी ने बताया कि मोक्ष प्राप्ति के लिए पूर्ण संत से सही नाम दीक्षा लेना आवश्यक है। गीता (अध्याय 17, श्लोक 23) में "ओम तत् सत्" मंत्र का वर्णन है, जिसे केवल पूर्ण तत्वदर्शी संत ही प्रदान कर सकते हैं।
संत रामपाल जी महाराज: वर्तमान में तत्वदर्शी संत
आज संत रामपाल जी महाराज ही प्रमाणित ग्रंथों के आधार पर वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। उनकी शरण में आकर नाम दीक्षा लें और मोक्ष मार्ग प्राप्त करें।
निर्वाण दिवस 2025 के विशेष कार्यक्रम
इस साल 6 से 8 फरवरी 2025 तक, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में 507वें निर्वाण दिवस के अवसर पर एक विशेष भव्य समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस समागम पर आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रम कुछ इस प्रकार हैं:
* निःशुल्क भंडारा : सभी श्रद्धालुओं के लिए 6 से 8 फरवरी 2025 तक निःशुल्क भंडारे का आयोजन होगा।
* निःशुल्क नाम दीक्षा : इस अद्वितीय अवसर पर संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त की जा सकती हैं।
* तीन दिवसीय अखंड पाठ : 6 से 8 फरवरी 2025, 3 दिनों तक संत गरीबदास जी महाराज जी के अमरग्रंथ साहेब जी के अखंड पाठ का आयोजन होगा।
* रक्तदान शिविर, निशुल्क नेत्र व दांतों की जांच, दहेज मुक्त विवाह और आध्यात्मिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।
* विशेष सत्संग प्रसारण : 8 फरवरी 2025 को संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग का विशेष प्रसारण साधना टीवी चैनल पर सुबह 9:15 बजे (IST) से होगा।
* सोशल मीडिया प्रसारण : इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण निम्नलिखित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर भी उपलब्ध होगा।
Facebook Page :- Spiritual Leader Saint Rampal Ji
YouTube :- Sant Rampal Ji Maharaj
Twitter :- @SaintRampalJiM
आप सभी इस महान आध्यात्मिक अवसर पर अवश्य पधारें करें और इस आध्यात्मिक समागम के आयोजन का लाभ उठाएं। इस आध्यात्मिक समागम में आने के लिए आप निम्न स्थानों पर पहुंच सकते हैं:
1. सतलोक आश्रम धनाना धाम, सोनीपत, हरियाणा
2. सतलोक आश्रम मुंडका, दिल्ली
3. सतलोक आश्रम धूरी, पंजाब
4. सतलोक आश्रम खमाणों, पंजाब
5. सतलोक आश्रम सोजत, राजस्थान
6. सतलोक आश्रम शामली, उत्तर प्रदेश
7. सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा
8. सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा
9. सतलोक आश्रम बैतूल, मध्य प्रदेश
10. सतलोक आश्रम इंदौर, मध्य प्रदेश
11. सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल
संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नाम दीक्षा लेने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ⬇️
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