कलियुग में इन महापुरुषों को मिले कबीर परमेश्वर
मैं रोवत हूँ सृष्टि को, और सृष्टि रोवे मोहे।
गरीबदास इस वियोग को, समझ न सकता कोए।।
ऊपर लिखी वाणी में पूर्ण परमात्मा अपनी प्रिय आत्मा सन्त गरीबदास जी महाराज जी से कहते हैं कि मैं अपने बच्चों के लिए दुखी होता हूँ और रोता हूँ। मैं उनका मोक्ष करवाने आता हूँ परन्तु मेरे बच्चे मुझे पहचान नहीं पाते। इस तरह ये सृष्टि अर्थात मेरी आत्माये मेरे लिए रो रही हैं, मुझे पुकार रही हैं कि हे परमेश्वर हमें इस लोक से मुक्त करवाओ। हमारे बीच का यह जो वियोग है उसे कोई नहीं समझ सकता।
परमेश्वर कबीर साहेब जी चारों युगों में अपने निज धाम सत्यधाम अर्थात सतलोक से इस धरातल पर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओ को तत्वज्ञान समझाकर उन्हें शरण मे लेते हैं और उनका कल्याण करते हैं। परमात्मा ने बताया है कि
सतयुग में सत सुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा।
द्वापर में करुणामय कहाया, कलियुग नाम कबीर धराया।।
सतयुग में परमेश्वर सत सुकृत के नाम से, त्रेता युग मे मुनीन्द्र नाम से, द्वापर युग मे करुणामय नाम से आये और कलियुग में परमात्मा अपने वास्तविक नाम - कबीर नाम से प्रकट हुए। जब जब परमेश्वर इस धरातल पर आए तब तब बहु संख्या में अपनी आत्माओं को शरण मे लेकर उन्हें मोक्ष मार्ग दिखलाया। वर्तमान कलियुग में भी परमात्मा कबीर साहेब जी प्रकट हुए थे और बहुत से महापुरुषों को मिले, उन्हें ज्ञान समझाया और उन्हें सतभक्ति मन्त्र देकर उनका कल्याण किया। परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपनी प्रिय आत्माओ को कुछ इस प्रकार इस काल लोक के दलदल से निकलकर अपनी शरण में लिया और उन्हें मोक्ष दिया;
1. धर्मदास जी: मध्यप्रदेश में बांधवगढ़ गाँव के रहने वाले धर्मदास जी बहुत धनी सेठ व श्री ब्रह्मा जी-श्री विष्णु जी-श्री शिवजी के परम भक्त थे। आदरणीय धर्मदास जी की आध्यात्म में विशेष रुचि थी। उन्होंने रूपदास नामक गुरु से दीक्षा ली हुई थी। एक दिन अपने गुरुजी की आज्ञानुसार धर्मदास जी तीर्थ यात्रा करने लिए भ्रमण पर चले गए।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी जिंदा बाबा के रूप में प्रकट हुए और मथुरा में धनी धर्मदास जी से मिले। उनके साथ एक जिज्ञासु बनकर ज्ञान चर्चा की, उन्हें ज्ञान समझाया, प्रमाण बताए परन्तु धर्मदास जी अपने देवी देवताओं के विषय मे सच्चाई नही सुन सके जिस कारण वे गुस्सा हो गए। तब परमात्मा अंतर्ध्यान हो जाते हैं। फिर धर्मदास को अपनी गलती का अहसास होता है और वे रोते हुए परमात्मा से उसी जिंदा बाबा से मिलने की अरदास करते हैं। परमात्मा उन्हें इसी प्रकार बार-बार मिलते और ज्ञान समझाते परन्तु वे फिर किसी न किसी विषय पर विवाद शुरू कर देते जिस कारण परमात्मा अंतर्ध्यान हो जाते। इस तरह धर्मदास जी अत्यंत दुखी हुए और अंत में करीब 6 माह के बाद परमात्मा धर्मदास जी को दोबारा दर्शन देते हैं और तब धर्मदास जी सम्पूर्ण ज्ञान को ध्यानपूर्वक सुनते हैं, अपनी आन उपासना का त्याग कर परमेश्वर कबीर साहेब जी से नाम दीक्षा ग्रहण करते हैं।
उसके बाद कबीर साहेब जी उन्हें सतलोक लेकर गए, जहां उन्हें सच्चाई का अनुभव हुआ। इसके बाद धर्मदास जी ने पवित्र कबीर सागर, कबीर साखी, कबीर बीजक नामक ग्रंथों की रचना की, जो धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान को समझने में सहायक हैं।
आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।।टेक।।
सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर।।1।।
थारे दर्शन से म्हारे पाप कटत हैं, निर्मल होवै जी शरीर।।2।।
अमृत भोजन म्हारे सतगुरु जीमैं, शब्द दूध की खीर।।3।।
हिन्दू के तुम देव कहाये, मुस्लमान के पीर।।4।।
दोनों दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे ना पाये शरीर।।5।।
धर्मदास की अर्ज गोसांई, बेड़ा लंघाईयो परले तीर।।6।।
2. दादू साहेब जी: आदरणीय दादू साहेब जी भारतवर्ष के गुजरात राज्य के अहमदाबाद नगर में जन्में थे। दादू जी को बचपन से ही परमात्मा के प्रति बहुत लगाव था। जब वे सात वर्ष के हुए तब वो अपने मित्रों व साथियों के साथ खेत मे खेलने गए हुए थे। तभी वहाँ पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी जिंदा महात्मा के रूप में प्रकट हुए और दादू जी से मिले, उन्हें ज्ञान समझाया व नाम दीक्षा और पान परवाना देकर उन्हें सत्यलोक लेकर गए। वहाँ सर्व लोकों व अपनी स्थिति से परिचित करवाया एवं पुनः पृथ्वी पर वापस छोड़ा। तीन दिन तक दादू जी बेहोश रहे। होश में आने के पश्चात् परमेश्वर की महिमा की आँखों देखी बहुत-सी अमृतवाणी उच्चारण की।
जिन मोकू निज नाम दिया, सोई सतगुरु हमार |
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार ||
दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट |
उनको कबहू लागे नहीं, काल बज्र की चोट ||
केहरि नाम कबीर का, विषम काल गज राज |
दादू भजन प्रतापते, भागे सुनत आवाज ||
अबही तेरी सब मिटै, जन्म मरण की पीर |
स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर ||
3. मलूक दास जी: मलूक दास जी एक धनी किसान थे। 42 वर्ष की आयु में मलूक दास जी को कबीर साहेब जी मिले, उनके साथ एक लीला की जिससे उन्हें परमात्मा कबीर साहेब जी पर विश्वास हुआ। उसके बाद परमात्मा ने उन्हें तत्वज्ञान समझाया व सतभक्ति मन्त्र दिए। परमात्मा उन्हें सतलोक लेकर गए। दो दिन तक वे अचेत रहे, और जब होश में आए तो मलूक दास जी ने सचखंड और पूर्ण परमेश्वर को देखने के बाद निम्न वाणियां उच्चारित की।
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।।टेक।।
जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर |
एक समय गुरु बंसी बजाई कालंद्री के तीर |
सुर-नर मुनि थकत भये थे, रुक गया दरिया नीर ||
काँशी तज गुरु मगहर आये, दोनों दीन के पीर |
कोई गाढ़े कोई अग्नि जरावै, ढूंडा न पाया शरीर |
चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर |
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर ||
4. गरीब दास जी: सन्त गरीबदास जी का जन्म सन 1717 में हरियाणा में रोहतक के गांव छुड़ानी में हुआ। सन्त गरीबदास जी अपने माता पिता की इकलौती सन्तान थे। उन्हें प्रेम से सभी गरीबू बुलाते थे। गरीबदास जी अन्य पालियों के साथ अपने खेतों में गाय चराने जाया करते थे।
10 वर्षीय गरीबदास पहले की तरह ही अपने खेतों में अन्य पालियों के साथ गऊ चराने गए हुए थे। तभी वहाँ पूर्ण परमात्मा कबीर जी जिंदा बाबा के रूप में प्रकट हुए और एक यात्री की तरह वहाँ से गुजरने लगे। गरीबदास जी व अन्य पालियों ने कबीर जी से भोजन ग्रहण करने की प्रार्थना की तो परमेश्वर ने भोजन न करके कंवारी गऊ का दूध पीने की इच्छा व्यक्त की। तब गरीबदास जी अपनी प्रिय बछिया को कबीर जी के पास लाये और परमेश्वर ने आशीर्वाद से कंवारी गौ का दूध निकाला और वह ग्रहण किया और गरीबदास जी को भी दिया। उसके बाद गरीबदास जी को परमेश्वर ने ज्ञान समझाया और मन्त्र देकर सतलोक लेकर गए। परमेश्वर ने कहा कि वे 120 वर्ष तक काशी में धाणक (जुलाहा) रूप में रहकर आए थे और इस तरह कबीर साहेब जी ने उन्हें सतभक्ति व सतज्ञान देकर वापिस पृथ्वी पर छोड़ा। जिसके बाद से उन्होंने अमर ग्रंथ साहिब की रचना करवाई।
हम सुल्तानी नानक तारे, दादू कूं उपदेश दिया |
जाति जुलाहा भेद नहीं पाया, काशी माहे कबीर हुआ||
5. घीसा दास जी: आदरणीय घीसा दास साहेब जी को भी पूज्य कबीर परमेश्वर जी सशरीर उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में एक पावन ग्राम खेखड़ा में विक्रमी सं.1860 सन् 1803 में प्रकट होकर दर्शन दिये अपने प्यारे हंस घीसादास जी को प्रभु साधना करने को कहा तथा लगभग एक घण्टे तक सत्संग सुनाया। सात वर्षीय घीसा दास जी ने सत्यलोक चलने की प्रबल इच्छा व्यक्त की। तब प्रभु कबीर (कविर्देव) ने नाम दान दिया, मंत्रित जल पिलाया तथा कुछ मिश्री संत घीसा दास साहेब जी को खिलाई। अगले दिन सचेत होने के बाद घीसादास साहेब जी ने बताया कि यह बाबा जिंदा रूप में स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर जी थे, यही पूर्ण परमात्मा काशी में धाणक (जुलाहा) रूप में एक सौ बीस वर्ष रह कर सशरीर वापिस चले गए थे। कल मुझे अपने साथ सतलोक लेकर गए थे, आज वापिस छोड़ा है।
6. गुरु नानक देव जी: गुरु नानक देव जी को भी कबीर साहेब जी जिंदा बाबा के रूप में बेई नदी के तट पर मिले थे। वहाँ उन्होंने नानक जी के साथ बैठकर चर्चा की और ग्रंथो से प्रमाणित ज्ञान बताया। जब नानक जी को यह सुनकर अच्छा नहीं लगा तो परमात्मा वहाँ से चले गए। फिर नानक जी ने सभी प्रमाण मिलाये और बहुत पछतावा हुआ। करीब 6 माह के बाद कबीर साहेब जी उन्हें फिर बेई नदी के तट पर मिले और फिर से ज्ञान समझाया और सम्पूर्ण ज्ञान, ध्यान व सतभक्ति मन्त्र प्रदान करके 3 दिन तक सतलोक लेकर गए।
गुरु ग्रन्थ साहिब में नानक जी ने कबीर जी का बहुत बार उल्लेख भी किया है।
फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस
खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार ||
निष्कर्ष: कबीर जी ने कई महापुरुषों को दर्शन देकर उन्हें सत्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने धर्मदास, दादू साहेब, मलूक दास, गरीब दास, हज़रत मुहम्मद जी, और गुरु नानक देव जी को अपना शिष्य बनाया। आज भी उनके संदेश और उनके उपदेश हमें धर्म के मार्ग पर सही राह दिखाने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु रामपाल जी महाराज जी के रूप में आकर भी वे सत्य की प्राप्ति का मार्ग दिखा रहे हैं, जिससे मनुष्य अपने मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है।
इस वर्ष 20 जून से 22 जून 2024 तक, जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 627वें कबीर प्रकट दिवस के अवसर पर एक विशेष समागम का आयोजन किया जा रहा है। इस समागम पर आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है:
* निःशुल्क भंडारा: सभी आगंतुकों के लिए 20 से 22 जून 2024 तक निःशुल्क भंडारे का आयोजन होगा।
* निःशुल्क नाम दीक्षा: इस अद्वितीय अवसर पर संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त की जा सकती हैं।
* 3 दिवसीय अखंड पाठ: 20 से 22 फरवरी 2024 तक, 3 दिनों तक अखंड पाठ का आयोजन होगा।
* रक्तदान शिविर, निशुल्क नेत्र व दांतो की जांच, दहेज मुक्त विवाह और आध्यात्मिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।
* विशेष सत्संग प्रसारण: 22 जून 2024 को संत रामपाल जी महाराज के सत्संग का विशेष प्रसारण साधना टीवी चैनल पर सुबह 9:15 बजे (IST) से होगा।
* सोशल मीडिया प्रसारण: इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण निम्नलिखित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर भी उपलब्ध होगा:
■ Facebook page:- Spiritual Leader Saint Rampal Ji
■ YouTube:- Sant Rampal Ji Maharaj
■ Twitter:- @SaintRampalJiM
आप सभी इस महान अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करें और इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठाएं। वहीं इस कार्यक्रम में आने के लिए आप निम्न सतलोक आश्रम में आ सकते हैं:
1. सतलोक आश्रम धनाना धाम, सोनीपत, हरियाणा
2. सतलोक आश्रम मुंडका, दिल्ली
3. सतलोक आश्रम धूरी, पंजाब
4. सतलोक आश्रम खमाणो, पंजाब
5. सतलोक आश्रम सोजत, राजस्थान
6. सतलोक आश्रम शामली, उत्तर प्रदेश
7. सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र, हरियाणा
8. सतलोक आश्रम भिवानी, हरियाणा
9. सतलोक आश्रम बैतूल, मध्य प्रदेश
10. सतलोक आश्रम इंदौर, मध्य प्रदेश
11. सतलोक आश्रम धनुषा, नेपाल
संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नाम दीक्षा लेने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ⬇️
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God Kabir Prakat Diwas 22 June
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